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पशु आश्रय केंद्र संचालन करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

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प्रयागराज:रिपोर्ट इंद्रसेन सिंह: जारी शंकरगढ़  पशु आश्रय केंद्र का संचालन करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तक देखने को मिली ,जब गौशाला के अंदर मृत गाय को कुत्ता तथा कौवा नोंचते दिखे  इससे तो यही साबित होता है कि गौशाला के जिम्मेदार लोग शायद यहां आते ही नहीं हैं  बेसहारा मवेशियों को संरक्षित करने के लिए सरकार ने बड़ी संख्या में गौशाला की स्थापना करा दी है , लेकिन अनदेखी की वजह से दिन में बंधे बेसहारा और बेजुबान पशुओं का हाल बेहाल है गौशालाओं में बंधे बेसहारा पशु बिना पानी और चारा तथा इलाज के दम तोड़ रहे हैं इतना ही नहीं मृत पशुओं को दफनाने की व्यवस्था नहीं होने की वजह से इन्हें ग्राम प्रधान द्वारा कहीं भी खुले में फेंक दिया जाता है जिम्मेदारों पर लगा आरोप प्रयागराज जिले के विकासखंड शंकरगढ़ अंतर्गत अकौरिया ग्राम सभा मे बनी गौशाला में दो दिन से लगातार भूख - प्यास से तड़प - तड़प कर गायों की मौत हो रही है । यही नहीं पशु आश्रय केंद्र का संचालन करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब गौशाला के अंदर मृत गाय को ग्राम प्रधान चन्नेलाल बिना पंचनामा के दफनाने के जुगाड़ में दिखे  इससे यही साबित होता है कि गौशाला के जिम्मेदार लोग शायद यहां आते ही नहीं हैं गौशाला की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी की होती है , इनकी निगरानी में गौशाला का संचालन होता है दलालों को नहीं दिखती मृतक मवेशीपुराणों में एक कहावत कहीं गई थी, जब सैंया भए कोतवाल तब काहे की डर  यह कहावत बिल्कुल अकौरिया ग्राम सभा में बनी गौशाला से मिलती - जुलती साबित हो रही है जब पोर्टल वाले अपने आप को लगा बैठे पत्रकार तो मजाल है जीजा जी की गौशाला में कोई आँख उठा कर देखें  दोहा गाय मरे भूख चाहे प्यास से : हम चारों है आप की शान से शायद इसीलिए इन पोर्टल वाले रिस्तेदारों को गौशाला में पड़े मृतक मवेशी नहीं दिखाई दे रहें हैं।
डीआरएस न्यूज़ नेटवर्क

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