कार्तिक पूर्णिमा और नानक जयंती - DRS NEWS24 LIVE

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कार्तिक पूर्णिमा और नानक जयंती

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कार्तिक पूर्णिमा और नानक जयंती सनातन धर्म का अत्यंत ही महत्वपूर्ण पर्व है इस तिथि को देव दीपावली भी कहते हैं क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने अजर अमर तीन लोगों के स्वामी और प्रथम अंतरिक्ष नगर सोने चांदी और लोहे के बसाने वाले त्रिपुरा और का अर्धनारीश्वर रूप में वध किया था जिसकी खुशी में भगवान विष्णु ने उन्हें त्रिपुरारी नाम दिया और देवताओं ने खुश होकर दीपावली मनाएं जो काशी लोक था भगवान शिव की नगरी में मनाया गया सभी से इसको देव दीपावली भी कहा जाने लगा इस दिन काशी नगरी में संपूर्ण नदी के घाटों को अत्यंत ही सुंदर और भव्य ढंग से सजाया जाता है और मान्यता के अनुसार देवता लोग आकर गंगा में स्नान करते हैं इसी दिन गंगा में स्नान करने के कारण गंगा स्नान पूर्णिमा भी कहते हैं त्रिपुरारी अर्थात भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध प्रदोष बेला में किया था जब इतने दिन थाना रात थी ना सुबह था ना श्याम थे इसलिए प्रदोष काल में पूजा पाठ अत्यधिक लाभदायक है इसी दिन भगवान श्री हरि विष्णु का प्रथम अवतार मत्स्य अवतार भी हुआ था और पांडव वीरों ने इसी दिन गढ़मुक्तेश्वर में भगवान श्री कृष्ण की सलाह पर मरे हुए पूर्वजों को दीपदान किया था देवी तुलसी का विवाह तो एकादशी तिथि को हुआ था लेकिन उसे समग्र रूप से धरती लोक में कार्तिक पूर्णिमा को ही मनाया गया था और कार्तिक पूर्णिमा को ही भगवान ब्रह्मा का"हुआ था और इसी दिन से उन्होंने अपना कार्य प्रारंभ किया था
गुरु पूर्णिमा को महान युग पुरुष नानक देव का जन्म भी हुआ था जो वर्तमान में पाकिस्तान में है तलवंडी नमक जिस स्थान में गुरु नानक देव का जन्म हुआ था वहां आज भी उनकी स्मृतियां शेष हैं वह सनातन धर्म के महान रक्षक सिद्ध हुए जिन्होंने पूरे देश के अलावा अरब देशों और मक्का मदीना तक में सनातन धर्म की पताका फहराई वास्तव में भगवान बुद्ध भगवान महावीर स्वामी नानक देव इन लोगों का जन्म सनातन धर्म की रक्षा के लिए हुआ था कलंदर में उनके पंत और मान्यता को एक कूटनीति और राजनीति के तहत सनातन धर्म से अलग कर दिया गया और अलग धर्म का नाम दिया गया
बचपन से ही वे महान सन्यासी और दयालु तथा परोपकारी प्रकृति के थे जिनके शिष्य बाला लहना और मर्दाना थे एक बार वह मक्का मदीना में जाकर काबा की ओर पैर करके सो गए जिस पर वहां का काज़ी बहुत बिगड़ गया सब नानक देव ने मुस्कुराते हुए कहा कि मेरा पर उसे दिशा में कर दो जिधर तुम्हारे भगवान का निवास ना हो कहते हैं जब कई ने क्रोध में भरकर उनका पैर घूमाना शुरू किया तो जिधर वह उनका पैर घूमा ता उधर ही काबा दिखाई पड़ता ।इस पर वह अत्यंत लज्जित हुआ और गुरु नानक देव से क्षमा याचना की ओर उनका भव्य स्वागत सत्कार किया उनकी सारी रचनाओं गुरु ग्रंथ साहब में संकलित हैं जो मानवता की अमूल्य धरोहर है कालांतर में उन्हें के विचारों और पथ को एक नए सिख धर्म के रूप में मान्यता दे दी गई उनके जीवन से जुड़ी अनेक प्रेरक कथाएं हैं एक बार उनके पिता ने बचपन में उनको पैसे दिए और खरा सौदा करने को कहा जिस पर उन्होंने साधु संतों के भूखी टोली को भोजन खिला दिया और कहा मैंने सच्चा सौदा कर दिया है एक बार लाहौर के धन कुबेर जी और एक गरीब व्यक्ति ने उन्हें एक साथ निमंत्रण दिया और वह गरीब के भोजन किए इस पर धन कुबेर बहुत नाराज हुआ तब उन्होंने दोनों के घर की एक-एक रोती लेकर सबके सामने चौड़ा धन कुबेर की रोटी से खून और गरीब की रोटी से दूध निकल इस पर वह धन कुबेर नानक देव के पैरों में गिर पड़ा*
जिसमें से एक कथा यह है कि एक बार वे लोग किसी ऐसे गांव में रुके जहां उन्हें रुकने का स्थान तक नहीं दिया गया और बाहर गांव के बाग में उनका रात बितानी पड़ी तब उन्होंने जाते समय कहा कि ईश्वर करें यहां के सारे लोग एक ही स्थान पर रहे अगली बार में एक ऐसे गांव में गए जहां उनका भव्य स्वागत सत्कार मान सम्मान हुआ जब वह चलने लगे तो उन्होंने आशीर्वाद दिया कि इस गांव के लोग पूरी दुनिया में फैल  जाएं मरदाना ने जब आश्चर्यचकित होकर इसका कारण पूछा तब उन्होंने कहा कि गंदे लोग एक जगह एकत्र रहेंगे तो ठीक रहेगा वरना वह पूरा देश और दुनिया को  गंदी कर देंगे और अच्छे लोग फूलों की सुगंध और प्रकाश की तरह पूरी दुनिया को सुगंध प्रकाश और ज्ञान से भर देंगे
इस प्रकार कार्तिक पूर्णिमा का देश दुनिया में व्यापक महत्वपूर्ण स्थान है और 12 महीना चैत्र वैशाख जेठ आषाढ़ सावन भादो अश्विन (क्वार) कार्तिक अगहन पूष माघ फागुन में कार्तिक महीने की चांदनी सबसे धवल और उज्जवल होती है और यह भारतीय महीने के अनुसार नवा महीना माना जाता है और 9 महीने में ही बच्चों के गर्भ के बाद जन्म होता है इस समय आसमान भी स्वच्छ रहता है इस दिन चांदनी रात में अगर खुली आंखों से कोई किताब पढ़ सकता है तो तो यह निश्चित है कि उसकी आंख बिल्कुल ठीक है इस बारे में एक सच्ची कहावत है कार्तिक की तो शोभा न्यारी लगती बहुत चांदनी प्यारी
वर्ष 2023 विक्रम संवत 2080 में कार्तिक पूर्णिमा 27 नवंबर को पड़ रही है क्योंकि 26 नवंबर को शाम को 3:45 से इसका प्रारंभ हो रहा है और 27 नवंबर को 2:45 पर समाप्त हो रही है ऐसे में उदया तिथि के अनुसार सनातन धर्म की जो परंपरा है यह पर्व 27 नवंबर को ही मनाया जाएगा लेकिन पूजा पाठ और व्रत की पूर्णिमा 26 को ही रहेगी जबकि स्नान दान की पूर्णिमा 27 को मनाई जाएगी जाड़ा और गर्मी के बीच में पड़ने वाला यह महान पर्व इतनी बड़ी-बड़ी घटनाओं के कारण हिंदी महीनो में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है इसीलिए कार्तिक महीने को ठंडक का बसंत भी कहा जाता है डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी पर्यावरणविद ज्योतिष शिरोमणि एवं निदेशक अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान और विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर

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