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प्रभात सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ने मनाई भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि

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बाराबंकी हासेमऊ प्रभात सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ने उच्चतर माध्यमिक विधालय हासेमऊ पोस्ट ऑफिस असई, जनपद बाराबंकी में भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि समारोह पूर्वक मनाई गई कार्यक्रम के मुख्या अतिथि ग्राम प्रधान हासेमऊ रहे जो की बाबा साहेब के जीवन से बहुत प्रभावित रहते है।  इस अवसर पर विद्यालय में सभी विद्यार्थियों के बीच निबंध प्रतियोगिता आयोजित कराई गई जिसमें प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पर आने वाले विद्यार्थियों को नकद धनराशि देखकर पुरस्कृत किया गया। बाद में बच्चों को प्रेरणा देने के लिए बाबासाहेब आंबेडकर से जुड़ी उनके संघर्ष की जीवन के बारे में मुख्या अतिथि एवं विधालय के प्रधानाचार्य ने अपने अपने विचार व्यक्त किये और बताया कि भारत के झंडे पर अशोक चक्र लगवाने वाले डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर ही थे। डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर लगभग 9 भाषाओं को जानते थे।भीमराव अंबेडकर ने 21 साल की उम्र तक लगभग सभी धर्मों की पढ़ाई कर ली थी।भीमराव अंबेडकर ऐसे पहले इन्सान थे जिन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी  विदेश जाकर की थी। भीमराव अंबेडकर  के पास लगभग 32 डिग्रियां थी। बाबासाहेब आजाद भारत के पहले कानून मंत्री थे। डॉ भीमराव अंबेडकर छुआछूत की पीड़ा को जन्म से ही झेलते आए थे। जाति प्रथा और ऊंच-नीच का भेदभाव वह बचपन से ही देखते आए थे और इसके स्वरूप उन्होंने काफी अपमान का सामना किया।1920 के दशक में मुंबई में डॉ भीमराव अंबेडकर ने अपने भाषण में यह साफ-साफ कहा था कि “जहां मेरे व्यक्तिगत हित और देश हित में टकराव होगा वहां पर मैं देश के हित को प्राथमिकता दूंगा परंतु जहां दलित जातियों के हित और देश के हित में टकराव होगा वहां  मैं दलित जातियों को प्राथमिकता दूंगा।” वे दलित वर्ग के लिए मसीहा के रूप में सामने आए जिन्होंने अपने अंतिम क्षण तक दलितों को सम्मान दिलाने के लिए संघर्ष किया। सन 1927 में अछूतों को लेने के लिए एक सत्याग्रह का नेतृत्व किया। और सन 1937 में मुंबई में उच्च न्यायालय में मुकदमा जीत लिया।
डीआरएस   न्यूज़ नेटवर्क

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