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फाइलेरिया के विषय में मीडिया के साथ बैठक में जानकारी दिया उचित निर्देश

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आजमगढ़ :रिपोर्ट नीरज पण्डित:मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर आईएन तिवारी ने कहा कि फाइलेरिया एक ऐसी लाइलाज बीमारी है जो धीरे-धीरे रोगी को दिव्यांगता की ओर ले जाती है। और जीवन में एक बोझ बनकर रह जाती है। इस बीमारी के उन्मूलन में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका की आवश्यकता है। सभी मीडिया बंधुओं से अपेक्षा है कि विभिन्न संचार माध्यमों के जरिये फाइलेरिया मुक्त भारत का संदेश जन जन तक पहुंचाने में सहयोग करें।
फाइलेरिया आईडीए अभियान के संबंध में आयोजित एक दिवसीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला को बुधवार को संबोधित कर रहे थे। सीएमओ ने कहा कि 10 से 28 फरवरी तक ट्रिपल ड्रग थेरेपी आईडीए (आइवर्मेक्टिन डीईसी एल्बेण्डाजोल) अभियान चलने जा रहा है जिसमें अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को अपने सामने फाइलेरिया रोधी दवा खिलाएंगे। उन्होंने बताया कि इस अभियान में सभी योग्य लाभार्थियों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए ‘आइवर्मेक्टिन डीईसी एल्बेण्डाजोल’ की निर्धारित खुराक खिलाई जाएगी। इसके तहत पांच वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को आईवरमेक्टिन दवा सहित दो से पांच वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को डीईसी और एल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर, अपने सामने मुफ्त खिलाई जाएगी। यह दवा दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को नहीं खिलाना है। दवा खाली पेट नहीं खानी है और इसे स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही खाना आवश्यक है।अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व नोडल अधिकारी डॉ एके चौधरी ने आईडीए अभियान में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका पर प्रकाश डाला और जनसमुदाय से अपील की कि जब भी आशा कार्यकर्ता व उनकी सहयोगी दवा खिलाने जाएं तो उनका सहयोग करें। घर के सभी पात्र लाभार्थी को दवा अवश्य खिलाएं। दवा खिलाने के लिए बनाई गई प्रत्येक टीम 25 घर जाकर दवा खिलाएगी। उन्होंने बताया कि लक्षित आबादी 46 लाख को कवर करने के लिए कुल 4009 टीम बनाई गई हैं तथा दवा का सेवन कराने वाले 8018 स्वास्थ्यकर्मियों तैयार किया गया है। इसके पर्यवेक्षण के लिए कुल 669 सुपरवाइज़र तैनात किए जाएंगे। जनपद में अब तक कुल फाइलेरिया के 1122 रोगी हैं जिसमें हाइड्रोसील के 274 और लिम्फोडीमा के 848 रोगी शामिल हैं। जिन ब्लॉक या क्षेत्र में ज्यादा मरीज हैं तो वहाँ अधिक ध्यान दिया जाएगा।जिला मलेरिया अधिकारी राधेश्याम यादव ने फाइलेरिया बीमारी मच्छर के काटने से होता है। इसको सामान्यत हाथीपांव भी बोलते है। इसमें पैरों और हाथों में सूजन के अलावा अंडकोष में सूजन जैसी दिक्कत होती है। व्यक्ति में संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 5 से 15 साल का समय लग जाता है। फाइलेरिया की यह दवा फाइलेरिया के परजीवियों को मार देती है।और लोगों को हाथीपांव व हाइड्रोसील जैसी बीमारियों से बचाती है। दवा खाने से जब शरीर में परजीवी मरते हैं तो कई बार सिरदर्द, बुखार, उलटी, बदन में चकत्ते और खुजली जैसी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। इनसे घबराना नहीं है और आम तौर पर यह स्वतः ठीक हो जाते हैं। अगर किसी को ज्यादा दिक्कत होती है तो आशा कार्यकर्ता के माध्यम से ब्लाक रिस्पांस टीम को सूचित कर सकता है।मीडिया की तरफ से आए सवाल के जवाब में नोडल अधिकारी व जिला मलेरिया अधिकारी ने दवा का सेवन न करने पर होने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी दी और रुग्णता प्रबंधन व दिव्यांग्ता रोकथाम (एमएमडीपी) का तरीका बताया। इस अवसर पर नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ एके चौधरी, जिला मलेरिया अधिकारी राधेश्याम यादव, बायोलोजिस्ट डॉ हरिकेश लाल, सहयोगी संस्था डब्ल्यूएचओ, पाथ, पीसीआई और सीफार के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
डीआरएस न्यूज़ नेटवर्क

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